ऐसे प्रकरण हमेशा ही वन स्टॉप सेंटर (सखी) में आते रहते हैं जन्हा पति पत्नी के बीच ज्यादा तनाव केवल इसलिए रहता है कि घर के बड़ो का नकारात्मक हस्तक्षेप ज्यादा रहता है या पति पत्नी को ऐसा महसूस होता है कि यदि बड़े हम दोनो के बीच न बोले तो सब अच्छा रहेगा।
इसमें कितनी सच्चाई है कितनी नही? इसका निर्णय नही लिया जा सकता क्योंकि संयुक्त परिवार में बड़ो की अदब और सम्मान के कारण भी कई रिश्ते अच्छे से रहते हैं और कई बार रिश्ते टूटते भी इसी कारण है। ऐसा ही एक प्रकाण साक्षी(परिवर्तित नाम) का पुलिस थाने द्वारा भेजा गया था । उनका कहना था की साक्षी अपने पति पर केस करना चाहती है तो आप उसकी मदद कीजिए। जब प्रशासक डॉ वंचना सिंह परिहार ने साक्षी से पूछा गया तो उसने कहा वो एक बार अपने पति के साथ बात करना चाहती है अगर बातचीत के दौरान उसे जो भी ठीक लगेगा वैसा वह आगे निर्णय लेना चाहेगी। केसवर्कर शिवानी श्रीवास को साक्षी के कथन लेने और अन्य कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया।शिवानी को कथन लेने के दौरान यह आभास हो गया था कि झगड़ा बड़ा नही है बहुत मामूली बातो पर एक परिवार बिगड़ रहा है ऐसे में तुरंत ही पति पियूष(परिवर्तित नाम) को बुलाया गया उससे पूछा गया तो उसने बताया की वह साक्षी के साथ रहना चाहता है। यह सब वह गुस्से में कर रही है ।
फिर क्या था दोनो के मध्य परामर्श सत्र रखा गया जिसमे दोनो की छोटी छोटी बाते सामने आई जो दोनो के झगड़े की वजह बनी। साक्षी का कहना था कि उसका पति ससुराल वालो के सामने पत्नी का पक्ष ना लेता है और अपने पिता के साथ काम पूरा करता है कन्ही और दूसरी जगह काम भी नहीं करता है और उसके बाद भी उनसे ज्यादा खर्चे के पैसे नहीं लेता है,, जिससे हम लोगो की जरूरत पूरी करने की जगह हमे परेशान करता है। और पति की शिकायत थी की मेरी पत्नी अपने मायके वालों की बातो में आकर झगड़ा कर छोटी छोटी बात में मायके चली जाती है और वहा से थाने पर शिकायत करने लगती है। बस इन्ही वजह से दोनो के मध्य झगड़े सुलझ नहीं रहे थे।
परामर्श दात्री शर्माती नीलम को केस दिया गया और परामर्श दात्री ने दोनो पक्षों को पहले प्यार से सुना,जब दोनो पक्षों के मन का सारा गुस्सा सामने निकल गया तब दोनो को समझाया और दोनो के बचपने को अलग रख आगे बेहतर भविष्य के लिए निर्णय लेने का कहा । दोनो पक्षों के मध्य यह तय हुआ कि पत्नी आपस के झगड़े को मायके तक नहीं ले जाएंगी और पहले घर में उसे सुलझाने की कोशिश करेगी। और पति पीयूष भी अपने परिवार और भविष्य के लिए खर्चे के अलावा कुछ पैसे जोड़ेंगे ताकि आगे भविष्य में काम आ सके। और जहां पत्नी सही हो वह हमेशा उसका साथ देंगे ।
बस इसी के साथ न्यायालय जाने के पहले एक रिश्ता परामर्श के माध्यम से वन स्टॉप सेंटर से सुलझ गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी ,महिला बाल विकास विभाग जिला इंदौर श्री रामनिवास बुधौलिया का कहना है कि उनका उद्देश्य है कि उनके विभाग में आने वाले घरेलू प्रक्रारणो को वो पहले परामर्श और समझौते के माध्यम से समाधान कारण चाहते हैं जिससे विवाह और परिवार जैसी संस्था का सम्मान बना रहे क्योंकि पति पत्नी के विवाद से संतानों के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।इसलिए विभाग की प्राथमिकता पारिवारिक समझौता एवम पुनर्वास है लेकिन यदि फिर भी कोई समझने को तैयार नहीं होता है गाइडलाइन के अनुसार व्यथिता को विधिक,पुलिस एवम न्यायलयीन सहायता उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इंदौर
घर के बड़े यदि समझदारी दिखाएं तो पति पत्नी का रिश्ता हो सकता है बेहतर
- 25 Nov 2022



