नई दिल्ली. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत और मजबूत कर दी है. उसका तीसरा परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (CVN-77) अब मिडिल ईस्ट क्षेत्र में पहुंच गया है. यह कैरियर अफ्रीका के दक्षिणी छोर (केप ऑफ गुड होप) से घूमकर आया है, ताकि लाल सागर के खतरनाक रास्ते से बच सके. अब इस क्षेत्र में अमेरिका के पास तीन बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर हो गए हैं. इससे अमेरिकी नौसेना की हवाई ताकत, हमला करने की क्षमता और क्षेत्र में नियंत्रण बहुत बढ़ जाएगा.
यह अमेरिकी नौसेना का निमित्ज़ क्लास का 10वां और आखिरी सुपर कैरियर है. यह 2009 में सेवा में आया था. इसका नाम अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के नाम पर रखा गया है.
यह एक फ्लोटिंग एयरबेस की तरह काम करता है, जो बिना किसी विदेशी आधार के हजारों किलोमीटर दूर से भी हवाई हमले कर सकता है. यह कैरियर परमाणु ऊर्जा से चलता है, इसलिए इसे ईंधन भरने की जरूरत बहुत कम पड़ती है. यह कई सालों तक लगातार समुद्र में रह सकता है.
साभार आज तक
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लाल सागर का खतरा टालकर मिडिल ईस्ट पहुँचा अमेरिकी सुपर कैरियर; अब तीन युद्धपोतों से होगी समुद्र की घेराबंदी
- 24 Apr 2026



