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इंदौर

सृष्टि की उत्पत्ति का विमोचन एवं अन्य पुस्तकों का लोकार्पण

  • 08 Jul 2022

इंदौर। शब्द ही ब्रह्म है और उसकी आराधना साहित्य है। जहाँ सत्यम् शिवम् सुंदरम् की त्रिवेणी है, वहाँ साहित्य है। साहित्य सूक्ष्म तरंगों का आईना है। ये विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पद्मासिंह के है, जो उन्होंने यांत्रिकी इंजीनियर एवं पूर्व मुख्य अभियंता डॉ. रवीन्द्र दत्तात्रेय ढोबले द्वारा रचित पुस्तक सृष्टि की उत्पत्ति का विमोचन करते हुए मुख्य अतिथि के रुप में व्यक्त किये।
यह जानकारी समाज सेवा प्रकोष्ठ के सचिव सुबोध भोरास्कर ने दी। डॉ. पद्मासिंह ने आगे कहा कि डॉ. ढोबले की पुस्तकें पाठकों को एक नई दृष्टि देती है, उनके पास ज्ञान का विशाल भंडार है, जो नई पीढ़ी के लिये बहुत उपयोगी है, हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिये, प्रकृति और पुरूष एक-दूसरे के पूरक है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी  पुष्पकुमार दीक्षित ने कहा कि डॉ. ढोबले केवल एक इंजीनियर, लेखक और कवि ही नहीं एक बेहतर इंसान भी है और उनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। मीडिया प्रभारी प्रवीण जोशी ने बताया कि डॉ. पद्मासिंह, पुष्पकुमार दीक्षित, पुष्पा महाडिक, श्याम पांडेय ने लेखक डॉ. रवीन्द्र दत्तात्रेय ढोबले का शॉल और श्रीफल से सम्मान किया। इस मौके पर डॉ. ढोबले की 10 से अधिक लिखी पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। अतिथि स्वागत बलराज जाटव, के.एल. रावल, डॉ. अर्पणा उमडेकर, पुष्पा महाडिक ने किया। अतिथि परिचय श्याम पांडेय ने दिया। कार्यक्रम का संचालन सुरेश उपाध्याय ने किया। अंत में आभार माना समाज सेवा प्रकोष्ठ के सचिव सुबोध भोरास्कर ने।