इंडियन ऑथोर्पेडिक एसोसिएशन एमपी चैप्टर की 40 वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस
इंदौर। रोड एक्सीडेंट होने पर अक्सर सबसे पहले नजदीकी अस्पताल ले जाया जाता है, जहाँ कई बार तकनीक और ट्रेनिंग के अभाव में दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को सही इलाज नहीं मिल पाता है। वही अन्य जटिल बीमारियों और सर्जरी के लिए भी ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को शहरों का रुख करना पड़ता है, जिसमें इलाज के अलावा मरीज के परिजनों के रहने और खाने का खर्च भी बहुत ज्यादा हो जाता है। इन्हीं सब परेशानियों को देखते हुए इंडियन ऑथोर्पेडिक एसोसिएशन एमपी चैप्टर की 40 वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के सरकारी जिला अस्पतालों के असिस्टेंट सर्जन्स को हाई-टेक ऑथोर्पेडिक सर्जरी की हैंड्स ऑन ट्रेनिंग दी गई। इस ट्रेनिंग सेशन में स्कॉटलैंड से आए एक्सपर्ट सर्जन डॉ शिव गोपाल ने कूल्हे की हड्डी के आसपास के जटिल फ्रैक्चर्स के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हर साल सिर्फ मध्यप्रदेश में ही 10 हजार लोग रोड एक्सीडेंट्स का शिकार होते हैं और उन्हें कूल्हे की हड्डी से जुड़े गंभीर फ्रैक्चर होते हैं। ऐसे फ्रैक्चर जानलेवा साबित हो सकते हैं या व्यक्ति को जीवन भर के लिए अपंग भी बना सकते हैं इसलिए सही समय पर सही इलाज मिलना बहुत ज्यादा जरुरी होता है। इंडियन ऑथोर्पेडिक एसोसिएशन एमपी चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ प्रमोद नीमा ने बताया कि मेडिकल ट्रेवलिंग का ट्रेंड इन दिनों बहुत बढ़ गया है। इंदौर से 30 प्रतिशत जनता जटिल ऑपरेशंस के लिए मेट्रो सिटीज का रुख करती है वही आसपास के ग्रामीण इलाकों से 40 प्रतिशत जनता इलाज के लिए इंदौर आती है। कॉन्फ्रेंस के ऑगेर्नाइजिंग सेक्रेटरी डॉ मनीष माहेश्वरी ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में 30 से ज्यादा नेशनल-इंटरनेशनल फैकल्टी और 600 डेलीगेट्स शामिल हुए। ऑगेर्नाइजिंग चेयरमैन अलोक जैन ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के पहले शुक्रवार को तीन कैडेवरिक वर्कशॉप हुई, जिसमें नी रिप्लेसमेंट, कूल्हे के पासपास की हड्डियों के फ्रैक्चर और स्पाइन सर्जरी की हैंड्स ऑन ट्रेनिंग दी गई।
इंदौर
40 प्रतिशत जटिल सर्जरी ग्रामीण जिला अस्पतालों में ही संभव
- 08 Oct 2022



