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खुली चिठ्ठी

चोला - चरण - वचन का कुछ तो विचार करें ..पूज्यवर !

  • 25 Feb 2026

मानमर्दन आपका हो या उनका ..सही में तो नकारात्मक प्रभाव इष्ट-शिष्ट, शिष्यों - अनुयायियों सहित सनातन धर्म का ही हो रहा है और होगा..
ये कोई दुर्वासा काल नहीं और आपकी ऐसी कोई तप शक्ति भी नहीं है तो राजसत्ता से धर्मसत्ता तालमेल क्यों ना करें..
जिस काल में राजनीति का दंड ,धर्म दंड से अधिक प्रभावी हो जाए वहां ऐसे समय समझदारी से मध्यगामी होते हुए तदनुरूप जिव्हा का अनुशासन करना चाहिए ।
धर्म का मुख्य वेश तो प्रेम और सद्भाव का है उसमें ये आत्मकेंद्रित स्वभाव का आना धर्म की गिरावट ही है।
आप कोई प्रश्नोत्तरी में भाग नहीं ले रहे
आप कोई छोटा या बड़े के अहंकार की प्रतिस्पर्धा में नहीं है कि प्रतिक्रिया देने की तीव्रता आपको बार बार मीडिया की तरफ दौड़ लगवा दे ।
दो कदम पीछे लीजिए यदि आप उस महान गादी  पर विराजित हैं।
दो मीठे बोल बोलिए यदि आप उस महान संस्कृति के अनुगामी हैं। 
दो कठोर शब्दों को क्षमा के साथ बहने दीजिए यदि आप उस महान परंपरा के दृष्टा हैं।।
कृपया चोला - चरण - वचन का कुछ तो विचार करें ..पूज्यवर !