हम यह जरूर बोलेंगे...हम यह बोलने नहीं देंगे..ये डील में सब बेच दिया ..नहीं नहीं हमारी डील ठीक है..हम झुके नहीं..
बस ये सब बोलने नहीं बोलने की हंगामा में ही संसद सत्र में रुपए स्वाहा फक्त हो गए । तकरीबन यदि प्रतिदिन ₹9 करोड़ का औसत मानें, तो अब तक अनुमानित खर्च ₹100 करोड़ से अधिक हो सकता है।
अरे भाई बाहर बोल लो, छोटी छोटी यात्राएं,नुक्कड़ सभा जैसे चुनावों में हो हल्ला करके बतियाते फिरते हो गरियाते फिरते हो... शुरू हो जाओ फिर..
लेकिन संसद में तो ठीक ठाक काम कर लो..सूट bu टाई टीशर्ट कोट पेंट में सजेसंवरे भाई लोग वहां क्यों अखाड़ा परिषद बनाए फिरते हो..
पेपर फेंकना..दूसरों की सीट पर जाकर चिलाना हंगामा करना ये देख सुन कर कुछ ठीक नहीं लगता मितारो..!
तुर्रा ये कि हम बोले तुम सुनो लेकिन तुम बोलो हम भगमभागी करें
ये सब क्या नौटंकी रे बाबा
हर सत्र में ये सब अब कॉमन हो गया
बैठो - सुनो ...सहमत ना हो तो बोलो...नहीं परमिशन मिले तो कोई बात नहीं प्रॉपर मीडिया कॉन्फ्रेंस करो ..अपने कार्यकर्ताओं द्वारा जन जन तक उस मुद्दे पर वैचारिक अभियान चलाओ ...
लेकिन वहां चिल्लाना भागना दौड़ना ये सब कुछ जमता नहीं. ..
अब नहीं सुधरे तो कब सुधरेंगे ..?
कुछ अच्छा करो भाई लोगो जो जहां है वही से अपनी जितनी क्षमता है कुछ तो सही करो आखिर कब तक वही सब पुराने बेमानी हो चुके ढर्रे पर खुद भी चलोगे और अपनी अपनी पार्टी को घिसते रहोगे ।
अभी तक साफ पानी , अच्छा स्वास्थ्य , पौष्टिक भोजन नहीं दे पाए देश में ,
मेरे देशप्रेमियों ...!
#पुष्प ( सोशल मीडिया से साभार)
अन्य
कॉमन मेन की बाते समझने का दावा करने वाले कॉमन मैनर्स भी नहीं समझते..!
- 21 Feb 2026



