"सरके चुनरी"गाना सुना..एक लाइन के कुछ शब्द जरूर हलचल का मौसम बना रहे है अब कुछ शब्द कान से होते हुए मन को ललचाते हुए दिमाग में कोई दृश्य क्रिएट करते हैं तो उसमें क्या..
लेकिन बाकी सब तो ठीक ठाक और Party Lover song बनेगा ये तय है ..!
रास्ते में चलते हुए कई बार गालियों की ध्वनि गूंजती है वो इग्नोर करते हैं ना ..!
देह अधिक कपड़े कम कई बार दृश्य होते हैं तो इग्नोर करते हैं ना ..!
बस थोड़ी चिंता ये है कि अबोध बच्चिया बिना बोल समझे इस पर डांस करेगी तब देखने वाले समझ के भरे भूसे और भरेपूरे क्या चित्त सम्हाल पाएंगे ...
अब जब फिल्में ही रक्तरंजीत हो चली ..
अब जब हीरो ही विलेन हो गया..
अब जब कोमलांगियो को स्वछंदता के साथ साथ मसल्स और नशे के छल्ले पसंद हो रही .तो तो तो
ये सब भी धीरे धीरे सामने आएगा ही
बचने वाले बचते रहेंगे फिसले हुए और रगड़ेंगे जब तक की खुद ना रुके वाले
खुद को सहेजना है ये सब तो चलता और आता जाता ही रहेगा
Music - Dance steps सब वैसा ही है जैसा अक्सर नोरा मैडम जी के परफॉर्मेंस में होता आया है ...
डायरेक्टर प्रोड्यूसर को जो करना था वो कर चुके वो यही चाहते थे कि विवाद हो बदनामी में ही नाम तो हो गया
आखिरकार हम लोग भी तो संवाद से ज्यादा विवाद को महत्व दे रहे हैं बाजार बिचारा क्या करे जब सब का मोबाइल अतरंगी नीला हो चुका है तब उनको भी तो माल बेचना होगा ...धुरंधर की आंधी में बाकियों को भी तो माल छापना है तो फिर
हंगामा क्यों बरपा....
#पुष्प ( FB वॉल से साभार



