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इंदौर

अस्पतालों में कलेक्टर और सीएमएचओ ने जांची आक्सीजन प्लांट की सेहत

  • 28 Dec 2022

इंदौर। कोरोना संक्रमण की आशंका के बीच मंगलवार को इंदौर के अस्पतालों में मौजूद आक्सीजन प्लांटों की जांच शुरू की गई। इस दौरान यह देखा जा रहा है कि ये प्लांट पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं या नहीं। इन प्लांटों से मिलने वाली आक्सीजन की शुद्धता कितनी है।इंदौर जिले के 48 अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट लगे हैं।
मंगलवार सुबह सीएमएचओ डा. बीएस सैत्या हुकमचंद पाली क्लीनिक पहुंचे। उन्होंने यहां आक्सीजन प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल के डा. आशुतोष शर्मा भी मौजूद थे। वहीं मनोरमा राजे क्षय चिकित्सालय के प्लांट की जांच कलेक्टर इलैया राजा टी. व अन्य डाक्टरों ने की। कलेक्टर ने अस्पताल की सभी व्यवस्थाओं पर संतोष जताया। कलेक्टर ने कहा कि अगर कोरोना का कोई मरीज मिलता है तो उसे एमआरटीबी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। यहां वेंटिलेटर की व्यवस्था दुरुस्त है।
स्वास्थ्य आयुक्त को भेजेंगे रिपोर्ट
सिविल सर्जन डा. प्रदीप गोयल ने बताया कि अस्पतालों में लगे इन आक्सीजन प्लांटों की रिपोर्ट तैयार कर स्वास्थ्य आयुक्त को भेजी जाएगी। चीन में कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद जिले के शासकीय और निजी अस्पतालों में स्थापित आक्सीजन प्लांटों की जांच के आदेश दिए गए हैं। माकड्रिल के दौरान यह देखा जा रहा है कि आकस्मिक परिस्थिति में ये प्लांट काम कर पा रहे हैं या नहीं। इंदौर के अस्पतालों में आक्सीजन प्लांटों की स्थिति क्या है। अगर अचानक कोविड के मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ती है तो अस्पतालों में आक्सीजन की व्यवस्था है या नहीं।
कोरोना की दूसरी लहर में हुई थी परेशानी
गौरतलब है कोरोना की दूसरी लहर में अस्पतालों में आक्सीजन की कमी की वजह से मरीजों को खासी परेशानी हुई थी। लोगों को प्लाटों के बाहर घंटों खड़े रहकर सिलिंडरों में आक्सीजन भरवानी पड़ी थी। इसके बाद शासन ने अस्पतालों में आक्सीजन प्लांट स्थापित करने के आदेश दिए थे। डा. सैत्या ने बताया कि मंगलवार को पीसी सेठी, हुकमचंद पालीक्लीनिक, अरण्य नगर अस्पताल के साथ देपालपुर, महू, मानपुर के अस्पतालों में स्थापित आक्सीजन प्लांटों की जांच की जाएगी।
संसाधनों की जानकारी जुटाएंगे
कोरोना की आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग जिले के शासकीय और निजी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी जुटा रहा है। इसके लिए सभी अस्पताल संचालकों से जानकारी मांगी गई है। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौकों पर जाकर देखेंगे कि अस्पताल संचालकों ने जानकारी सही दी है या नहीं।