कोर्ट ने दिया 25 जुलाई तक समय, जारी रहेगी नीलामी की प्रक्रिया पर लगी रोक
इंदौर। इंदौर के हुकमचंद मिल की 42.49 एकड़ जमीन के मामले में बुधवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) को कोर्ट में बताना था कि मिल की जमीन की कीमत छह साल में बढऩे के बजाय कम कैसे हो गई। छह साल पहले जिस जमीन का न्यूनतम मूल्य 400 करोड़ रुपये आंका गया था उसकी कीमत भू-उपयोग औद्योगिक से आवासीय और व्यावसायिक करने के बाद कम कैसे हो गई, लेकिन डीआरटी के वकील ने इसके लिए समय मांग लिया। कोर्ट ने मिल की जमीन की नीलामी की प्रक्रिया पर पूर्व में लगाई रोक को जारी रखते हुए सुनवाई 25 जुलाई तक आगे बढ़ा दी। इधर नगर निगम ने भी डीआरटी द्वारा जमीन की कीमत कम आंकने को लेकर एक आवेदन प्रस्तुत किया है।
गौरतलब है कि हुकमचंद मिल की जमीन को बेचने के लिए आधा दर्जन से ज्यादा बार विज्ञप्ति जारी हो चुकी है लेकिन जमीन बिक नहीं पा रही है। जमीन का भू-उपयोग औद्योगिक से बदलकर आवासीय और व्यावसायिक करने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जमीन आसानी से बिक जाएगी लेकिन हाल ही में डीआरटी द्वारा जारी नीलामी की विज्ञप्ति से जमीन बेचने में पेच फंस गया। 2016 में डीआरटी ने मिल की जमीन का आरक्षित मूल्य 400 करोड़ रुपये आंका था, लेकिन हाल ही में जारी निविदा में इसे सिर्फ 385 करोड़ रुपये रखा गया। मजदूर इसी पर आपत्ति ले रहे हैं। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने डीआरटी से इस संबंध में जवाब मांगते हुए नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। बुधवार को डीआरटी का जवाब नहीं आया।
इंदौर
डीआरटी नहीं बता पाया बढऩे के बजाय कम कैसे हो गई हुकमचंद मिल की जमीन की कीमत
- 14 Jul 2022



