25 नवंबर के बाद विवाह के हैं कई सारे शुभ मुहूर्त, आंवले और गन्ने का पूजा में होता है उपयोग
इंदौर। देवउठनी एकादशी का पर्व आज शहर में उत्साह से मनाया जा रहा है। शाम को श्रद्धालु बेर, भाजी, आंवला, उठो देव सांवला के जयघोष के साथ भगवान का मनुहार कर उन्हें जगाएंगे और गन्ने से सजे मंडप में तुलसी और सालिगराम का विवाह होगा। शहर में देवउठनी एकादशी की तैयारियां सुबह से शुरू हो गई हैं। परम्परानुसार देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार माह क्षीर सागर में विश्राम करते हैं, इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान भोलेनाथ करते हैं।
देवउठनी एकादशी के चलते शहर के बाजारों में रौनक नजर आने लगी है। एकादशी के बाद 25 नवम्बर से विवाह के शुभ मुहूर्त भी प्रारंभ हो जाएंगे, ऐसे में बाजारों में त्योहारी सीजन के बाद लग्न सीजन की खरीदारी भी शुरू हो गई है। इसी प्रकार बाजारों में देवउठनी एकादशी के लिए पूजन सामग्री, गन्ने सहित अन्य जरूरी खरीदारी का दौर चल रहा है। इस बार देवउठनी एकादशी के दौरान शुक्र अस्त रहेगा, इसलिए इस सिद्ध मुहूर्त पर भी विवाह के योग नहीं है।
25 नवम्बर से विवाह के शुभ मुहूर्त आएंगे
ज्योतिष मठ संस्थान के पंडित विनोद गौतम ने बताया कि विवाह के लिए गुरु और शुक्र दोनों का उदित होना जरूरी होता है। गुरु जहां दाम्पत्य जीवन में धार्मिक, मांगलिक कार्यों, धार्मिक यात्राएं, पूजन पाठ, आध्यात्मिकता प्रदान करता हैं, वहीं शुक्र जीवन में भौतिक सुख साधन, सम्पन्नता प्रदान करता है। इसलिए गुरु और शुक्र की ऊर्जा की मौजूदगी में ही मांगलिक कार्य होते हैं। शुक्र उदित होने के बाद 25 नवम्बर से विवाह के शुभ मुहूर्त आएंगे।
इंदौर
देवउठनी एकादशी पर आज अनेक आयोजन
- 04 Nov 2022



