नई दिल्ली। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में जरूरतमंद लोगों के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए एक नई व्यवस्था बनाई है। मामलों की सुनवाई में प्राथमिकता देने के लिए चार श्रेणियां बनाई गई हैं। ये नई श्रेणियां दिव्यांगों और एसिड हमले के पीड़ितों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले और वे लोग जो मुफ्त वकील सहायता के जरिए कोर्ट पहुंचते हैं। इस नई व्यवस्था की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि सोमवार और शुक्रवार को लगने वाले लगभग 800 मामलों की भीड़ में उनके मामले नीचे दब जाते थे। इन्हीं दो दिनों में सुप्रीम कोर्ट की 16 बेंच नई याचिकाओं पर सुनवाई करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से जारी लेटर में वकीलों, स्वयं उपस्थित पक्षकारों और सभी हितधारकों से अनुरोध किया गया है कि वे दायर की जाने वाली सभी नई याचिकाओं में यह जरूर दर्ज करें कि यह मामला किस श्रेणी में आता है साथ ही इसका एक सरकारी प्रमाण भी जमा करें। इससे सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामलों की सूची को प्राथमिकता देने में सहायता मिलेगी।
देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा निपटाए गए मामलों की विशाल संख्या किसी भी अन्य देश के सर्वोच्च न्यायालय से कहीं अधिक है। 2025 में, सुप्रीम कोर्ट में 75,280 मामले दाखिल किए गए - 51,357 दीवानी और 23,923 आपराधिक। इसमें 65,403 मामलों (कुल दर्ज मामलों का 87%) का निपटारा किया, जिनमें 42,793 दीवानी और 22,610 आपराधिक मामले शामिल हैं।
इसके विपरीत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं, लेकिन वह केवल 70-80 मामलों पर ही सुनवाई के लिए स्वीकार करता है। 29 दिसंबर तक, ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट को 200 से कुछ अधिक मामले प्राप्त हुए थे और उसने लगभग 50 मामलों में फैसले सुनाए थे। वहीं भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 1,400 से अधिक लंबे फैसले और हजारों मामलों के निपटारे के आदेश दिए।
साभार नवभारत टाइम्स



