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इंदौर

पिताश्री ब्रह्मा बाबा की 54 वीं  पुण्य तिथि मनाई

  • 19 Jan 2023

खुद को भूल खुदा से मिलाया सर्व आत्माओं को पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने
इंदौर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के  साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा का स्मृति दिवस पूरे ब्रह्माकुमारी संस्थान के देश विदेश के 8500 से अधिक सेवाकेन्द्रों पर विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया गया। ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े लाखों भाई बहनों ने मन और मुख का मौन रख विशेष तपस्या द्वारा विश्व में शांति और सदभावना  के वाइब्रेशन फैलाये।
इंदौर न्यू पलासिया स्थित ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने कहां कि इस दुनिया में कुछ लोग इतिहास बनाते हैं तो कुछ लोग खुद ऐसे महान कर्म करते हैं जो खुद इतिहास बन जाते हैं ,वह अपने पीछे निशान छोड़ जाते हैं जो लाखों करोड़ों के लिए पथप्रदर्शक व  प्रेरणास्त्रोत बन जाते हैं। ऐसे  महान युग प्रवर्तक थे प्रजापिता ब्रह्मा। पिताश्री ब्रह्मा ने  निराकार परमपिता परमात्मा को अपना सब कुछ समर्पित कर अपने देह का भी अस्तित्व भूल सर्व आत्माओं को खुदा  ईश्वर से मिलाने का महान कार्य कियो ब्रह्मा बाबा के जीवन में  साधारणता एवं महानता , प्यूरिटी एवं रॉयल्टी तथा आध्यात्मिकता एवं बौद्धिकता का अद्भुत संतुलन  था े उनका समूचा जीवन विश्व कल्याण के लिए समर्पित था।
18 जनवरी के उपलक्ष्य में आयोजित बने ब्रह्मा बाप समान योग तपस्या कार्यक्रम में गांधीनगर गुजरात से पधारी ब्रह्माकुमारी कैलाश दीदी ने पिताश्री के संग बिताये पलों को याद करते हुए कहा कि 11 वर्ष की अल्पायु में ही मैं ब्रह्मा बाबा के संपर्क में आई और उनकी शक्तिशाली आत्मिक दृष्टि और पितृवत पालना से मेरे जीवन में दिव्य शक्ति का संचार शुरू हो गया। मैंने बाबा के साधारण कलेवर में साक्षात् देवत्व का दर्शन कियो बाबा के जीवन में कठिन से  कठिन  परीक्षाएं आई लेकिन बाबा ने ईश्वर के द्वारा दिए गए सत्य ज्ञान के आधार से सदा अचल अडोल निर्भय रहे वे सत्यता के अवतार थे।  ब्रह्माकुमार ओमप्रकाश भाईजी सभागृह ज्ञान शिखर में माउन्ट आबू स्थित ब्रह्मा बाबा की समाधि शांति स्तंभ की प्रतिकृति के सामने  हेमलता दीदी , अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर मनीष कपूरिया, पूर्व महापौर डॉ उमा शशि शर्मा, डॉ शिल्पा देसाई, डॉ गिरीश टॉवरी , ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी  के साथ सैकड़ो भाई बहनों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हुए उनके पद चिन्हों पर चलकर स्वयं के अंदर सम्पन्नता लाने का संकल्प किया।