सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अनंत शुभ फल देने वाला माना गया है। यह केवल सोना-चांदी खरीदने का पर्व नहीं, बल्कि सत्कर्म, दान, तप और संयम के माध्यम से अपने जीवन को “अक्षय” बनाने का अवसर है।
इसी दिन भगवान परशुराम जी का अवतरण हुआ—जो शक्ति, धर्म और न्याय के प्रतीक हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि ज्ञान और बल तभी सार्थक है जब वह अधर्म के विरोध और धर्म की रक्षा के लिए प्रयुक्त हो।
ब्राह्मण का सच्चा आचरण क्या है?
ब्राह्मण होना केवल जन्म नहीं, बल्कि कर्म और आचरण का विषय है।
सत्य बोलना
शास्त्रों का अध्ययन एवं प्रचार
अहंकार से दूर रहना
समाज को सही मार्ग दिखाना
दया, क्षमा और संयम रखना
यदि इन गुणों का पालन नहीं है, तो केवल “ब्राह्मण” कहलाना पर्याप्त नहीं। आज के समय में सबसे बड़ा तप यही है कि हम अपने धर्म और कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें।
इस पावन अवसर पर संकल्प लें:
धर्म के मार्ग पर चलने का
अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाने का
समाज में सद्भाव और सत्य फैलाने का
यही सच्ची पूजा है, यही सनातन की पहचान है।
(बाबा पण्डित)
बाबा पंडित
अक्षय तृतीया एवं भगवान परशुराम जयंती का संदेश
- 18 Apr 2026



