इलेक्ट्रिक बसों से पेट्रोल - डीजल का उपयोग कम होगा , 50 हजार बसे खरीदेगी सरकार , हर राज्य को दी जाएंगी
इंदौर। इंदौर में केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सार्वजनिक परिवहन प्रणाली कार्यक्रम में डीजल के उपयोग को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों में किराया डीजल की तुलना में 30 प्रतिशत कम हो सकता है. जल्द ही पूरे देश में 50 हजार इलेक्ट्रिक बसें तैयार की जा रही है.। ईंधन के दूसरे साधनों के तौर पर ग्रीन हाइड्रोजन, इथेनॉल और बायो-सीएनजी के इस्तेमाल पर भी फोकस किया जाएगा.।
देश में दशकों से लोक परिवहन के इकलौते साधन रहे बसों का स्वरूप अब बदलेगा. भूतल परिवहन मंत्रालय ने देशभर में डीजल से चलने वाली बसों को धीरे धीरे हटाकर पूरी परिवहन व्यवस्था को इलेक्ट्रिक बसों से अपग्रेड करने का प्लान तैयार किया है. जल्द ही देशभर में 50 हजार इलेक्ट्रिक बसें तैयार की जा रही हैं, जो जल्द ही विभिन्न राज्यों को उनकी मांग के अनुसार भेज दी जाएगी।
ऐसी रहेगी इलेक्ट्रिक बसें
गडकरी ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसे कार्ड सिस्टम पर रहेगी । इन बसों में परिचालक नहीं रहेगा। यात्रियों को एक कार्ड बनवाना पड़ेगा। इस कार्ड के जरिए बस का दरवाजा खुलेगा और बंद होगा। इसमें किसी को पैसे देने की भी जरुरत नहीं रहेगा। सारा काम कार्ड से ही होगा।
डीजल बसों से 30 फीसदी कम होगा किराया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम को कभी लाभ नहीं होगा, क्योंकि उनकी बसें महंगे डीजल पर चल रही हैं। वे बोले मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों में टिकट की कीमत डीजल वाली बसों की तुलना में आसानी से 30 फीसदी सस्ती हो जाएगी। गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार देश में 50,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की अपनी योजना पर आगे बढ़ रही है। . देश की परिवहन व्यवस्था को ज्यादा समय के लिए बदलने की जरूरत है. मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बजाय हमें बिजली, हरित हाइड्रोजन, इथेनॉल और बायो-सीएनजी जैसे सस्ते विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए।
इंदौर
इलेक्ट्रिक बसों में न परिचालक होगा न पैसे देना होंगे, सारा काम कार्ड सिस्टम से होगा
- 03 Aug 2022



