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इंदौर

कृषि महाविद्यालय की जमीन बचाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में विद्यार्थियों का दो घंटे तक धरना

  • 03 Aug 2022

इंदौर। शासकीय कृषि महाविद्यालय की जमीन बचाने के लिए विद्यार्थियों के आंदोलन ने तेजी पकड़ ली है। मंगलवार दोपहर महाविद्यालय के कई छात्र-छात्राएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर दो घंटे तक धरना दिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने महाविद्यालय की जमीन वापस लेकर इसे बेचे जाने के राज्य शासन के निर्णय के विरोध में जमकर नारेबाजी की। इस दौरान प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने उनका रास्ता रोका। विद्यार्थियों से ज्ञापन लेने के लिए पहले दो एसडीएम मुनीषसिंह सिकरवार व अंशुल खरे पहुंचे। इसके बाद एडीएम पवन जैन भी आए, लेकिन विद्यार्थी कलेक्टर मनीषसिंह को बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
अंत में विद्यार्थी प्रशासनिक संकुल के प्रवेश द्वार पर ज्ञापन चस्पा करके लौट आए। विद्यार्थियों के इस आंदोलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। एडीएम ने विद्यार्थियों को समझाया कि वे नारेबाजी न करें, जो ज्ञापन लेकर आए हैं, वह दे सकते हैं।
इस पर विद्यार्थी परिषद के प्रांत मंत्री घनश्यामसिंह चौहान, महानगर मंत्री लक्की आदिवाल, रोहित मालवीय, साक्षी व्यास आदि ने यह बात रखी कि कृषि महाविद्यालय की जमीन को लेकर शहर में 13 दिन से आंदोलन चल रहा है। एक बार कलेक्टर खुद ही विद्यार्थियों के समक्ष स्थिति स्पष्ट कर दें तो ठीक रहेगा।
इस पर एडीएम ने कहा कि कलेक्टर साहब जनसुनवाई में व्यस्त हैं। विद्यार्थियों ने कहा कि हम इंतजार कर लेंगे, लेकिन उनसे मिलकर ही जाएंगे। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर कायम रहे। दो घंटे तक यह घटनाक्रम चलता रहा। अंत में आंदोलनकारी विद्यार्थी प्रशासनिक संकुल के प्रवेश द्वार पर ज्ञापन चस्पा किया।
धरना प्रदर्शन में कृषि महाविद्यालय के पूर्व छात्र राधे जाट, रणजीत रघुनाथ, शुभम बिर्ला सहित बड़ी संख्या में कृषि छात्र भी मौजूद थे। विद्यार्थियों का कहना है कि कृषि महाविद्यालय देश के सबसे पुराने कृषि महाविद्यालयों में से एक है। हम तो इस महाविद्यालय को विश्वविद्यालय बनाने की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशाासन महाविद्यालय को ही खत्म करने पर तुला है। इस अनुसंधान परिसर का प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर कृषि में महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन दुर्भाग्य हैं कि इस महाविद्यालय की कृषि योग्य भूमि वापस लेने की योजना बनाई जा रही है। इस भूमि को सिटी फारेस्ट या आक्सीजन जोन बनाने के नाम पर वापस लेने के प्रस्ताव से कृषि अनुसंधान, बीज उत्पादन, कृषि शिक्षा आदि प्रभावित होंगे, जो कृषि एवं किसानों की उन्नति में गतिरोध उत्पन्न करेंगे।