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वोटों की खातिर 'फ्रीबीज' का खेल: SBI की चेतावनी—जरूरी कल्याणकारी योजनाएं हो रही हैं प्रभावित

  • 07 Mar 2026

नई दिल्ली। चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए राज्यों द्वारा मुफ्त उपहार (फ्रीबीज), खासकर बैंक खातों में नकद दिए जाने से सरकारी खजाने पर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.7 फीसदी तक बोझ पड़ता है, जिससे कई बार जरूरी कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होती हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की एक रिपोर्ट में फ्रीबीज पर चिंता जताते हुए मुफ्त उपहार और बैंक खातों में नकदी जैसी फ्रीबीज योजनाएं लागू करने पर खर्च की सीमा जीएसडीपी का फीसदी तक सीमित करने की सिफारिश की है ताकि सरकार की जरूरी व कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित नहीं हो।
विधानसभा चुनाव के दौरान जनता को नकद और मुफ्त उपहार देने से राज्यों के खर्च और बजट विश्लेषण को लेकर एसबीआई की शोध रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आएं हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि हम हम राज्यों के बजट देखें, तो विधानसभा चुनावों में किए गए वादे अलग-अलग राज्यों के लिए जीएसडीपी का का 0.1 - 2.7 फीसदी जो कि राज्यों के अपने कुल राजस्व वसूली का लगभग 5 से 10 फीसदी खर्च होते हैं। कुल राजस्व का एक फीसदी सीमा तय हो ।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से ठीक पहले अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार (फ्रीबीज), खासकर बैंक खातों में नकद दिए जाने की आलोचना की थी। शीर्ष अदालत ने इस पर रोक लगाने को जरूरी बताया। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकारों द्वारा नकद भुगतान की नीति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि सरकारों को लोगों मुफ्त उपहार या नकद देने के बजाए, रोजगार के रास्ते बनाने चाहिए ताकि वे कमा सकें और अपनी इज्जत और आत्म-सम्मान बनाए रख सकें।
साभार लाइव हिन्दुस्तान