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शताब्दी वर्ष पर मोहन भागवत का संदेश: व्यक्तिगत चरित्र निर्माण से होगा राष्ट्र का विकास, किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं

  • 19 Jan 2026

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि भेदभाव खत्म करने के लिए मन से जाति को मिटाने की जरूरत है। संघ प्रमुख ने कहा कि अगर सामाजिक व्यवहार से जातिगत भेदभाव को खत्म करना है, तो सबसे पहले जाति को मन से मिटाना होगा। उन्होंने आगे कहा कि पहले जाति पेशे और काम से जुड़ी थी, लेकिन बाद में यह समाज में गहरी जड़ें जमा गई, जिससे भेदभाव बढ़ा। भागवत RSS के शताब्दी वर्ष के हिस्से के रूप में छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित जन संगोष्ठी में बोल रहे थे।
संघ प्रमुख ने आगे कहा कि इस भेदभाव को खत्म करने के लिए, मन से जाति को खत्म करना होगा। अगर यह ईमानदारी से किया जाए, तो 10 से 12 साल में जातिगत भेदभाव खत्म हो जाएगा। दर्शकों के सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने कहा कि संघ का लक्ष्य समाज के साथ मिलकर भारत को उसकी परम गौरव तक ले जाना है।भागवत ने कहा कि संघ व्यक्तिगत चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए काम करता है। उन्होंने कहा कि यह किसी प्रतिक्रिया से बना संगठन नहीं है, और न ही यह किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में है।
एक अन्य कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि धर्म ही पूरी सृष्टि का संचालक है। जब सृष्टि बनी, तब उसे चलाने के लिए जो नियम बने, वही धर्म है। पूरी दुनिया उन्हीं नियमों पर चलती है। इसलिए कोई भी पूरी तरह अधर्मी नहीं हो सकता। राज्य भले ही सेकुलर हो सकता है, लेकिन मनुष्य, प्रकृति या सृष्टि की कोई भी चीज धर्म के बिना नहीं रह सकती।
साभार नवभारत टाइम्स