तव कथामृतम्...!
वशिष्ठ जी को भगवान राम ने प्रश्न पूछा कि महाराज... मुझे 4 वस्तु बताओ...मैं जीवन में आचरण कर सकूं और फिर समाज को कह सकूं... वशिष्ठ जी ने राम जी को 4 वस्तु बताई...
मोक्षद्वारे द्वारपालाश्र्चत्वारः परिकीर्तिताः
शमो विचारः संतोषश्र्चतुर्थः साधुसङ्गमः
हे राघव... मोक्ष के द्वार पर 4 द्वारपाल खड़े हैं...
शमो विचारः संतोषश्र्चतुर्थः साधुसङ्गमः
1...शमो...यानि शांति... शांत रहना... आप यहां कथा में जितने शांत हो उसके 5 प्रतिशत भी यदि घर में शांति रखोगे ना तो मोक्ष के द्वार में हमारा प्रवेश हो जाएगा... सबके बीच में शांत रहना...
2... विचार...विचार को बहुत महत्व दो...विचार में बहुत ताकत है... आप विचार के बिना कथा मत सुनो... विचार करो... बहुत मनन करो... मोरारी बापू ने कहा इसलिए मान मत लो...एक विचार आदमी को डिप्रैस कर दे...एक विचार आदमी को बैठा कर दे....
3...संतोष... जीवन में संतोष... कहीं तो रुकना पड़ेगा...तृष्णा ही दुख का कारण है... प्रमाणिक प्रयत्न करो... पुरुषार्थ करो... लेकिन परिणाम में जो आए उसमें फिर संतोष रखो...
वशिष्ठ जी बहुत ही व्यवहारिक निर्णय देते हैं कि तुम शांत न रह सको... शांति न रख सको... तो चलो कोई बात नहीं.. तुम्हारी गलत विचार...दुर्विचार करने की आदत हो... उसमें तुम लिप्त रहो तो चलो वो भी जाने दो... संतोष ना कर पाओ.... जीव स्वभाव के कारण... चलो उसको भी जाने दो.... लेकिन चौथा....
4...साधु का संग कर लो... जो साधु का संग करेगा उसको शांति मिलेगी... जो साधु का संग करेगा उसके विचार निर्मल होंगे...जो साधु का संग करेगा उसको लगेगा कि अब क्या बाकी रहा... उसको संतोष मिलेगा....
इसलिए आपने पूछा है तो संक्षेप में कहूं... साधु का संग करो....
(रामकथा -मानस शिव संकल्प)
साभार -ChitrkutdhamTalgajarda



