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बाबा पंडित

"शादी संस्कार है सिर्फ इवेंट नहीं "

  • 09 May 2026

वो मंत्र, वो विधि, जो पीढ़ियों से रिश्ते को संस्कार देती आई है,उसे आज “बैकग्राउंड एक्टिविटी” बना दिया गया है।
आजकल के शादियों का नया ट्रेंड देख रहे हो?
विवाह कम… “इवेंट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट” ज्यादा लगने लगा है।
हल्दी में थीम, मेहंदी में डीजे, संगीत में एंट्री शॉट, ड्रोन कैमरा, स्लो मोशन, रील्स के लिए 20 टेक…
पर जैसे ही असली विवाह विधि शुरू होती है—
“पंडित जी जल्दी करिए”,
“इतना लंबा क्यों?”,
“बस सिंपल कर दीजिए…”
वो मंत्र, वो विधि, जो पीढ़ियों से रिश्ते को संस्कार देती आई है,
उसे आज “बैकग्राउंड एक्टिविटी” बना दिया गया है।और हद तो तब होती है जब
पुरोहित का मज़ाक उड़ाकर, उन्हें “ओल्ड फैशन” या “बोरिंग” कहकर
लोग खुद को मॉडर्न समझते हैं।
सवाल ये नहीं है कि शादियों में खुशियां क्यों हैं—
सवाल ये है कि क्या हम दिखावे के चक्कर में अपने ही संस्कारों को साइडलाइन कर रहे हैं?
रातभर डीजे पर थिरकने का टाइम है,
पर सात फेरे के मंत्र सुनने का धैर्य नहीं?
शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं,
दो परिवारों, परंपराओं और विश्वासों का संगम है।थोड़ा रुककर सोचिए…
क्या हम “वायरल रील” के लिए शादी कर रहे हैं
या “जीवनभर के रिश्ते” के लिए?
#सोच_बदलिए #संस्कार_समझिए #शादी_या_शो