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बाबा पंडित

।। नृसिंह जयंती ।।

  • 30 Apr 2026

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
अर्थ: मैं उन भगवान नरसिंह को प्रणाम करता हूं जो उग्र हैं, वीर हैं, महाविष्णु स्वरूप हैं, जिनकी आभा चारों ओर जलती हुई अग्नि के समान है, जिनका मुख सर्वव्यापी है, जो अत्यंत भीषण हैं, फिर भी अपने भक्तों के लिए कल्याणकारी (भद्र) हैं और जो साक्षात् मृत्यु की भी मृत्यु हैं।


ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्॥
अर्थ: हम भगवान नरसिंह को जानते हैं जिनके नख वज्र के समान हैं। हम उनकी आराधना करते हैं जिनके दांत तीक्ष्ण (नुकीले) हैं। वे भगवान नरसिंह हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।


नृसिंह कवचम् वक्ष्ये प्रह्लादेन उदितं पुरा।
सर्वरक्षाकरं पुण्यं सर्वोपद्रव नाशनम्॥
अर्थ: मैं उस नरसिंह कवच का वर्णन करता हूँ जो प्राचीन काल में प्रह्लाद द्वारा कहा गया था; यह पुण्यकारी है, सभी प्रकार से रक्षा करने वाला है और सभी दुखों व कष्टों का नाश करने वाला है।


लक्ष्मी नृसिंह चरणौ शरणं प्रपद्ये।
अर्थ: मैं लक्ष्मी सहित भगवान नरसिंह के चरणों में शरण लेता हूँ।


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